Ecosystem Dynamics of India's Largest Freshwater Lake (H)

कश्मीर में वुलर झील भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी वाली आर्द्रभूमि है। यह अद्वितीय ऊंचाई वाली झील, जैव विविधता वाली विस्तृत प्रजातियों का घर है। ये झील मछलियों और जलीय वनस्पति का समृद्ध स्रोत है, जिसमें प्राकृतिक रूप से उगने वाले ट्रैपा या वाटर चेस्टनट, इस झील को पड़ोसी गांवों के लिए आजीविका का एक स्रोत बनाते हैं। ये झील मध्य एशिया के फ्लाईवे में प्रवासी जल पक्षियों का एक महत्वपूर्ण निवास स्थान है, क्योंकि वे साइबेरिया से दक्षिण की ओर जाते हैं, और फिर इसी रास्ते से वापस लौटते हैं। 130 वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा का ये विशाल जल निकाय, बाढ़ से सुरक्षित रहने का एक प्राकृतिक बफर है। वर्षों से झेलम नदी से आने वाली हजारों टन गाद के जमा होने और अतिक्रमण के कारण वुलर झील का क्षेत्र सिकुड़ गया है। इस संदर्भ में, डब्ल्यूसीएमए यानी वूलर कंजरवेशन एण्ड मैनेजमेंट अथोरिटी, इस जमा हुई, गाद को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग ऑपरेशन चला रही है। डब्ल्यूसीएमए ने इसके खंबो की जियोटैगिंग करके वुलर की सीमाओं का भी सत्यापन किया है। पिछली शताब्दी से इस आर्द्रभूमि पर, बाढ़ नियंत्रण, कृषि और विलो प्लांटेशन के लिए तटरेखाओं और दलदलों क्षेत्रों में सुधार के लिए कई तरह के प्रयास किए गए है। हाल ही में, खरपतवारों के तेजी से बढ़ने की वजह चिंता का कारण बन रही है। लगातार बढ़ते और बार बार आते बाढ़ के पानी के खिलाफ बफर के रूप में कार्य करने की, आर्द्रभूमि की अंतर्निहित क्षमताओं में उल्लेखनीय कमी आई है। इसलिए निचले घाटी क्षेत्र, बाढ़ और सूखे की चपेट में आ जाते है। इस आर्द्रभूमि के प्राचीन आवास को पुर्नस्थापित करने के लिए, एक एकीकृत प्रबंधन योजना लागू की जा रही है। इस तरह की आर्द्रभूमि के पारिस्थितिकी तंत्र का प्रबंधन करने में विशेष चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।