Vigyanika - Bhopal (H)

इस बार विज्ञानिका कार्यक्रम मध्यप्रदेश के भोपाल से। वैज्ञानिक कवियों की बड़ी ज़िम्मेदारी बनती है कि वे हमें समाज के हित के लिए प्रेरित करें।जन-जन में वैज्ञानिक सोच विकसित हो सके, ऐसी कविताओं का सृजन करें। आप सोच रहे होंगे कि क्या कविता की साधना से यह संभव है ? क्या कविता प्रश्न पूछ सकती है ? क्या कविता हमें वैज्ञानिक समाधान भी बता सकती है ? इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए आइए सुनते हैं वैज्ञानिक चेतना से लैस उन कवियों को, जिनकी कविता आपकी आँखों में चमक ला सकती है और आपके सोचने-विचारने का नज़रिया भी बदल सकता है। वे मूर्धन्य कवि हैं - संतोष चौबे, देवेन्द्र मेवाड़ी, पंडित सुरेश नीरव, बलराम गुमास्ता, संतोष कौशिक, राग तैलंग, सारिका घारू, सुनील जैन, मधु मिश्रा, केदार गुप्ता, तृप्ति मिश्रा, और चेतन चर्चित।