Understanding The Science Behind Covid-19 Vaccine Clinical Trials - Life in Science with Pallava Bagla (H)

कोविड -19 वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण के पीछे, विज्ञान को समझना इंतजार की घड़िया खत्म हो गई हैं, भारत ने विश्वव्यापी महामारी से लड़ने के लिए दो टीकों के इस्तेमाल को मंजूरी दी है। विज्ञान के इस वर्ष में, भारतीय वैज्ञानिकों ने कोविड -19 के खिलाफ कम से कम 30 टीकों पर काम किया। बहुत ज्यादा चर्चा में होने बावजूद, बहुत से लोग ये नहीं समझ पाये, कि नैदानिक ​​परीक्षणों के पीछे गहन विज्ञान और नैतिकता भी होती है। एक नए टीके को विकसित करने के लिए उसके पूर्व-नैदानिक ​​या पशु परीक्षण और फिर नियामक अनुमोदन तक प्रत्येक परीक्षण के पीछे एक बड़ी प्रक्रिया होती है। नैदानिक ​​परीक्षणों में चरण 1, 2, 3 और 4 क्या होते हैं, और इन्हें किस प्रकार किया जाए, कि नया उत्पाद सुरक्षित और प्रभावशाली बने। ये सब जानने के लिए, हम नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के प्रमुख अन्वेषक डॉ. संजय के राय से मिले, जिन्होंने कोवाक्सिन के परीक्षण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। क्या इसके लिए कोई छोटा रास्ता अपनाया गया है और क्या नैदानिक ​​परीक्षण ज्यादा तेजी से किये गए हैं? इसका जवाब पाने के लिए, हम इन परीक्षणों में शामिल होने वाले, एम्स में न्यूरोसाइंसेस के प्रमुख डॉ. पद्म श्रीवास्तव से भी मिले। कोविड -19 महामारी की उलटी गिनती शुरू हो गई है। कोरोना हारेगा, देश जेतेगा!