Tapping Time - Life in Science with Pallava Bagla (H)

भारत के समय प्रहरी, सबको अपनी उंगलियों पर नचाते हैं! कहा जाता है कि न कोई शुरुआत है और न ही कोई अंत, ये सब केवल एक निरंतरता है और इनके बीच सिर्फ समय है। आज समय एक वस्तु बन गया है; यह बेचा और खरीदा जा रहा है, तो सही समय का पता कैसे चलता है? देखते हैं कि प्राचीन समय में घूप घड़ी से वक्त कैसे देखा जाता था और आज के दौर में परमाणु घड़ियों के इस्तेमाल से समय कैसे देखा जाता था। मिलिए, भारत के समय प्रहरी और नई दिल्ली में राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के निदेशक डॉ. दिनेश असवाल से और देखिए भारत की सुरक्षित समय प्रयोगशाला के अंदर का नजारा। डॉ.असवाल बताते हैं कि ई-कॉमर्स और साइबर सुरक्षा के लिए डिजिटल एरा टाइम स्टैंपिंग क्यों महत्वपूर्ण है। समय की सटीकता मापने में भारत दुनिया के शीर्ष पांच देशों में गिना जाता है। क्या लुनार या ग्रेगोरियन कैलेंडर समय की सटीकता को मापने का बेहतर तरीका है और भारत में दो समय क्षेत्र क्यों होने चाहिए। एक राष्ट्र के लिए एक ही मानक समय होना चाहिए, लेकिन डॉ.असवाल का दावा है कि दो समय क्षेत्र होने से भारत में पैसों की बचत हो सकती है। साथ ही वो ये भी बताते हैं कि सिंधु घाटी की खुदाई में पहली घड़ियों का स्वरूप शिव लिंग पर टपकता पानी था, जो वास्तव में समय का ध्यान रखने का एक तरीका था।

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