Hydropower: Harnessing the power of Water Part-2 (H)

एक अच्छी तरह से स्थापित तथ्य यह है, कि जीवाश्म ईंधन पर दुनिया की निर्भरता से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में बढ़ौतरी हो रही है, जिसकी वजह से हम पृथ्वी की जलवायु प्रणाली में काफी बड़े बदलावों को देख रहे हैं। हाल ही में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप-26) में, ब्रिटेन के ग्लासगो में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है, कि भारत 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करेगा। 2030 तक, भारत यह सुनिश्चित करेगा, कि उसकी ऊर्जा जरूरतों का 50%, नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त किया जाए और देश 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को एक अरब टन तक कम करने की दिशा में काम करेगा तथा जीडीपी की प्रति यूनिट उत्सर्जन सघनता को भी 45% से कम करेगा। भारत ने 2030 तक, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के अपने लक्ष्य को भी 450 से बढ़ाकर 500 कर दिया है, यानी इसे 50 गीगावाट बढ़ाया है। विज्ञान से आत्मनिर्भर भारत के इस एपिसोड में हम, जल ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका और स्वच्छ स्रोतों से बिजली की आपूर्ति बढ़ाने के भारत के अथक प्रयासों को देखेंगे। हम आपको अरुणाचल प्रदेश और असम की सीमा पर भी ले जाएगें, जहां सुबानसिरी नदी पर राष्ट्रीय जल विद्युत निगम, भारत की अब तक की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना का निर्माण कर रहा है। यहां हम देखेंगे, कि कैसे एनएचपीसी और उसके ठेकेदार, इस 2000 मेगावाट परियोजना के विशाल बुनियादी ढांचे के निर्माण में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का लाभ उठा रहे हैं। ये परियोजना लाखों घरों को रोशन करेगी और पूरी क्षमता से चालू होने के बाद असंख्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बिजली सप्लाई करेगी। हम जलविद्युत स्टेशनों के महत्वपूर्ण पहलुओं को भी देखेंगे, जैसेकि पहाड़ों के नाजुक भूगर्भीय स्थानों पर, हेड रेस टनल को बिना विस्फोटकों के कैसे ड्रिल किया जा रहा है? और टर्बाइन तकनीक का उपयोग अन्य पहलुओं के साथ बिजली उत्पन्न करने के लिए कैसे किया जाता है। इसके अलावा और भी काफी कुछ देखिए, इस विशेष एपिसोड में, केवल इंडिया साइंस पर।