Horticulture- Accelerating Farmers Growth (H)

कृषि और इसके विविध क्षेत्रों में भी बागवानी शामिल है, ये भारत में आमदनी और आजीविका का सबसे बड़ा स्रोत हैं। इसके महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है, कि भारत के 70 प्रतिशत ग्रामीण परिवार, आज भी अपनी आजीविका के लिए खेती—बाड़ी पर निर्भर हैं, इनमें से 82 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसान हैं। लेकिन भारत के विकास की कहानी में यहां के किसानों का योगदान, हम सभी के लिए गर्व की बात है। क्योंकि आजादी के बाद केवल दो दशकों में, हम अनाज के शुद्ध आयातक से, दुनिया के सबसे बड़े अनाज उत्पादक बन गए हैं। खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार, वैश्विक अनाज उत्पादन में भारत का योगदान लगभग 25 प्रतिशत है। हम दुनिया का 10.9 प्रतिशत फल उत्पादन करके दूसरे सबसे बड़े उत्पादक हैं, और दुनिया की 8.6 प्रतिशत प्रतिशत सब्जियां, आज हम उगा रहे हैं। ये हमारी प्रमुख उपलब्धियां हैं, लेकिन समय की मांग है, कि छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार किया जाए - इसिलिए कृषि पद्धतियों में विविधता लाना महत्वपूर्ण है और इस वजह से, भारत सरकार, बागवानी क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जिसमें सब्जियां, फल, सजावटी, औषधीय और सुगंधित फसलें शामिल हैं - कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 2014-15 में, इन फसलों को उगाने के लिए, किसानों को पूरी तरह से सहयोग देने के लिए, बागवानी के एकीकृत विकास मिशन की शुरुआत की - लेकिन इसमें बड़ी चुनौतियां हैं, इसलिए इस मिशन को सफल बनाने के लिए, किसानों के लिए ड्रिप सिंचाई, एकीकृत पोषक तत्व और कीट प्रबंधन समाधान जैसी नवीन और नई वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। और यह सब किस प्रकार किया जा रहा है, इसे देखने के लिए, इंडिया साइंस की टीम ने हरियाणा के करनाल में बागवानी उत्कृष्टता केंद्र की यात्रा की, इस केन्द्र से किसानों की स्थिति में बदलाव आ रहा है। भारत-इजरायल कृषि परियोजना (आईआईएपी) के कार्यान्वयन भागीदार, कृषि मंत्रालय के अंतर्गत, राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) और (मशाव) - इज़राइल की अंतर्राष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी हैं। विज्ञान से आत्मनिर्भर भारत के इस विशेष एपिसोड में इसके अलावा और भी काफी कुछ देखिए - केवल इंडिया साइंस पर।

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