Ease of Doing Science in New India (H)

क्या भारत वैज्ञानिक तौर पर महाशक्ति बन सकता है? इसके लिए भारत के पास सभी क्षमताएं मौजूद हैं और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, भारत ने अपनी (एसटीआईपी) यानी नई राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवोन्मेष नीति का एक प्रारूप जारी किया है, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के कामकाज के तौर—तरीके को बदलने पर जोर दिया गया है। सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी मसौदा नीति में, अगले दशक तक भारत को शीर्ष तीन वैज्ञानिक महाशक्तियों के बीच अपना स्थान बनाने पर बल दिया गया है। इस कार्यक्रम में नैनोटेक्नोलॉजिस्ट और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, डॉ. आशुतोष शर्मा ने 63 पृष्ठ वाली इस नीति की बारीकियों को विस्तार से समझाते हैं। इसमें हर पांच साल में अधिक से अधिक लोगों को विज्ञान की मुख्यधारा में लाने, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को अपनाने, पूर्णकालिक शोधकर्ताओं की संख्या को दोगुना करने और आरएंडडी पर दोगुना खर्च करने के प्रयासों के संकल्प की विस्तृत जानकारी है। इस नीति का उद्देश्य, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक आत्मनिर्भर भारत के आह्वान को ध्यान में रखते हुए, भारत को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ज्यादा आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रारूप को, कोविड -19 की महामारी के दौरान ड्राफ्ट किया गया था, जिसमें भारतीय वैज्ञानिकों ने कोविड -19 के संकट से निपटने के लिए, अपना काफी कीमती समय दिया है। यह ड्राफ्ट, भारत के कल्याण के लिए, लोगों द्वारा, लोगों को विज्ञान से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करता है।