DST-TDB (H)

Technology Development Board - प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड तकनीकी-उद्यमियों के सबसे पुराने प्रोत्साहक के रूप में उभरा है, और अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों को एक नया रूप देने वाला साबित हुआ है, जैसे कि, औषधीय और जैव प्रौद्योगिकी, रसायन और उर्वरक, सूचना प्रौद्योगिकी, बिजली से गतिशीलता, चिकित्सा उपकरण, कृषि व प्रौद्योगिकी संचार, ऊर्जा तथा अपशिष्ट उपयोग, रक्षा और एयरोस्पेस, साइबर सुरक्षा, बुनियादी-ढांचा तथा वस्त्र प्रौद्योगिकियां। हमारी विशाल जनसंख्या के जीवन को व्यापक रूप से उन्नत बनाने के लिए कई पहलुओं से देखने की ज़रूरत है। स्वास्थ्य देखभाल आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। लिहाज़ा, डी एस टी नें आखि़री चरण तक विकास करने की ठानी है। शायद इसीलिए टीडीबी पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया जाता है जो डी एस टी का केवल ऐसा निकाय है जो ज़्यादा जोखिम वाले व्यवसायों और मूलभूत विज्ञान को ऋण प्रदान करता है। ये हाल ही में हुआ है कि इस देश में नवाचार और प्रौद्योगिकियां ज़बरदस्त क्रांति लायी हैं। शुरूआती चरण में नवाचारों सुझावों की पहचान करना टीडीबी का उद्देश्य है, चाहे इसके लिए दूरदर्शिता को साकार करने में कोई जोखिम ही क्यों न उठाना पड़े । भारत की मज़बूत रक्षा प्रणाली में लगातार उन्नति हो रही है। इस आशा में कि भविष्य में सुरक्षा के लिए नवीन प्रौद्योगिकी की ज़रूरत पड़ेगी, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड नें टाटा पावर कम्पनी लिमिटेड - सामरिक इंजीनियरिंग प्रभाग, को वेमागल औद्योगिक क्षेत्र, ज़िला कोलार, कर्नाटक में पचास एकड़ ज़मीन पर ‘रक्षा निर्माण सुविधा’ को स्थापित करने के लिए अपना सहयोग दिया है। चाहे जोखिम उठाना हो या चुनौतियों को हल करना प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड नवीनतम प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बैठाता है और उनका पोषण करता है ताकि एक समृद्ध और आत्मनिर्भर देश का सपना पूरा हो सके।