DST - ISCA (H)

इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस, एशिया का सबसे पुराना वैज्ञानिक शोध संस्थान है. प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. महेंद्र लाल सरकार ने 29 जुलाई 1876 में इस गौरवशाली संस्था को स्थापित किया था। IACS ही वह संस्था है जहां पर प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक सर सी.वी. रामन ने दुनिया को रामन प्रभाव की संकल्पना दी, इसके साथ ही प्रकाश और रंग को देखने की हमारी दृष्टि को उन्होंने पुनः परिभाषित किया। 1930 में उन्हें भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। रामन की इस यात्रा ने IACS को दुनिया के वैज्ञानिक अनुसंधान के नक्शे पर लाकर खड़ा कर दिया और तब से इस संस्था ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। देश की आजादी के बाद मेघनाद साहा ने IACS में कार्य आरंभ किया। और यहां शोध की प्रगति के लिए अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। साहा के बाद, प्रसिद्ध भारतीय भौतिकशास्त्री सत्येन्द्र नाथ बोस IACS में राष्ट्रीय प्रोफेसर के रूप में शामिल हुए। IACS के सफर के दौरान अनेक महत्वपूर्ण पड़ाव आए, उल्लेखनीय वैज्ञानिक उपलब्धियां, महान खोज और असाधारण अनुसंधान यहां दर्ज हुए. प्रोफेसर के.एस. कृष्णन का क्रिस्टल चुम्बकत्व पर महत्वपूर्ण योगदान रहा. इसके अलावा भारत में पालीमर रसायन का सफर IACS से आरंभ हुआ था।इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, का एक स्वायत्त शोध संस्थान है। 145 से ज्यादा वर्षों के दौरान IACS ने वैज्ञानिक अनुसंधान में लगातार उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है और भारत में अंतर्राष्ट्रीय महत्व के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक उत्कृष्टता केन्द्रों में से एक महत्वपूर्ण केंद्र के तौर पर उभरकर सामने आया है। शोध के मामले में IACS भारत में सातवें और वैश्विक सतर पर 367 वें स्थान पर आता है। इण्डियन एसोसियेशन फार द कल्टीवेशन ऑफ साइंस ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर संस्थागत विश्वसनीयता हासिल की है। मूलभूत और आधुनिक विज्ञान के अग्रणी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अनुसंधान के लिए IACS अत्यंत समर्पित है।

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